लघु कथा 2 (70 बरस नहीं हैं!)
सर्दियों की ख़ास बात ये होती है कि जो धूप आपको मई के महीने में दुश्मन लगती है उसी से आपको प्यार हो जाता है, धूप में बैठना या छत पर चटाई डालकर आलस का अनुभव करना सबसे बड़ा सुख होता है सर्दियों का| इसी तरह की सर्दी पड़ रही थी हमारी नानी और नाना जी बाहर कुर्सियों पर धूप का आनंद ले रहे थे कि तभी कुछ लोग जो कि शक्ल से किसी संस्था से जुड़े लग रहे थे, हर घर में खटखटा कर चंदा की मांग कर रहे थे| तभी उनमें से एक व्यक्ति जो की उन सबका सरदार लग रहा था नाना जी के पास आया और बोला- बच्चा तेरे अब दिन नहीं बचे हैं अब तुझे बहुत जल्द ही बीमारी घेर लेगी तू नहीं बचेगा| नानी को पता नहीं क्या सूझी उन्होंने उन तथा कथित बाबा जी को बे सम्मान से पुकारा और कहा की बाबा जी हमारा भी कुछ बताओ हम कब तक जियेंगे| बाबा बड़े आत्मविश्वास से बोला की- आप तो अभी अपनी 70 की उम्र देखोगी| मेरी नानी के चेहरे पे एक अजीब मुस्कान थी जो तब होती है जब हम किसी का झूठ पकड़ लें और वो व्यक्ति अपने झूठ को जारी रखे| उसके इस जवाब के बाद नानी ने नाना को इशारा किया और नाना ने अपनी जेब से 20 का नोट निकाल कर उस बाबा को पकड़ा दिया वो अपने झूठे आशीर...