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वो मजदूर है साहब|

वो चलता है मीलों फिर भी, उसके चलने की आवाज़ नहीं होती| उठाता है भार क्षमता से अधिक, फिर भी आवाज़ में उसकी आह नहीं होती| वो मजदूर है साहब, फटा पहनता है, नंगे पैर चलता है, क्योकि और अधिक की उसे प्यास नहीं होती|                                              इसे पढ़ें- कर्म लौटकर आया(कहानी) वो सुनता है कटाक्ष और गालियाँ, उसे प्यार भरे शब्दों की चाह नहीं होती| चाहता है दो जून की रोटी और दाल, पर वो मजदूर है साहब, सूखी रोटी तो होती है, पर कटोरी में दाल नहीं होती|                                               इसे पढ़ें- जाने क्यों हमको भूल गए?( कविता ) नींद की वजह से वो तारे नहीं गिन पाता, बरसात में कोई अचकन सूखी नहीं होती| आखिर वो मजदूर है साहब, उसके पैरों तले ज़मीन तो होती है, पर सर पर छत नही होती|             ...

लघु कथा 3( कर्म लौटकर आया)

कार की सीट पर सीट बेल्ट लगाए हुए पूरी तरह से चौकन्ना और एसी चालू होने के बावजूद पसीने से लतपथ, कार की स्टीयरिंग व्हील को तेजी के साथ दाएं बाएं घुमाकर, कार को नियंत्रित करने की ...

जाने क्यों हमको भूल गए!

हवा बसंती इठलाकर जो छू ले लू सी हो जाये, जो पुष्प मनोहर सुगंध बिखेरे मुरझा वो सारे फूल गए, जो कहते थे कि संगी हैं हम अब जाने क्यों हमको भूल गए? मधुर लगी वाणी जिनकी उनके शब्द शूल ...