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याद उन यारों की।

कुछ यारों की याद आज भी आती है, जो आंखों से बूंदों की बरसात भी लाती है, अविस्मरणीय यादों की ठंडी हवा, हौले से गालों को छूकर जाती है। पर हम बड़े हो गए हैं और सब बदल गया है, वो लम्हा एक सपने सा फिसल गया है।                             इसे भी पढ़ें- कुछ ख़्वाहिशें हैं तुमसे वो सारी बातें हम बहुत पीछे छोड़ आये हैं, यादों को डायरी के पन्नों में मोड़ आये हैं। वो जो मोड़ पर छोड़ आये हैं, एक सुनहरी दुनिया, मंज़िल पर मिलेंगे हम फिर, ऐसे वादों से राहों को जोड़ आये हैं। इन समझदारों की दुनिया के काबिल बनने को, कुछ नासमझ से रिश्तों को तोड़ आये हैं।                                इसे भी पढ़ें- अधूरा एहसास हां यारों की यारी अब हमारी हमराही नहीं, पर हर जज़्बात को बक्से में समेट लाये हैं। खुद ही जलाए थे जो दिए प्यार के, उन्हें राहों में यूँही जलता छोड़ आये हैं। हां हम उन्हें उनकी दुनिया में, किसी और के हाथों सौंप आये हैं।      -...

कुछ ख़्वाहिशें हैं तुमसे

एक गुज़ारिश है तुमसे, जब बाल खोल कर आया करो, लटों को यूं सहलाया न करो, हटा कर केश चेहरे से जाल से बिखराया न करो।                        इसे पढ़ें-    अधूरा एहसास एक और गुज़ारिश है, जब कुछ बोलूं तो इठलाया न करो, अपने गालों को हौले से सहलाया न करो, गुस्से में होती हो तो बस लबों को दांतों से दाबाया न करो।                         इसे पढ़ें-  नज़रों के मिलते ही एक नन्हीं गुज़ारिश और है, जब भी देखूं तो मुझे देख मुस्काया न करो, हर बात की मेरी नकल दोहराया न करो, जानती हो तुम मुझे शिकवा नहीं तो हर बात का मतलब समझाया न करो।                          इसे पढ़ें- कर्म लौटकर आया है गुज़रिशें तो और बहुत हैं, वो जो हौले से हाथों को छू जाती हो, मेरी हर कविता के भाव में खो जाती हो, जो छू जाते हैं शब्द सागर की लहरों से, तो क्यों नहीं मुझे सपनों में  चूम जाती हो।       ...