कविता संख्या 10(हम दूर हो जायेंगे)

जब दूरी ना रहेगी बिलकुल,
पर हम बहुत दूर हो जायेंगे,
सोचा ना था कि खुद ही,
इतना मजबूर हो जायेंगे|
ना ही समझेंगे, ना ही विचारेंगे,
कि तेरी खता क्या थी,
हम तेरे इश्क में बदनाम थे,
अपनी गजलों में तेरा नाम कर जायेंगे|

जब ये चांदनी ना रहेगी निशा में,
फिर भी चाँद होगा आसमां में,
सोचा ना था ज़िन्दगी में,
ये नज़ारे भी देख पायेंगे|
ना ही चाहेंगे, ना ही मांगेंगे,
तेरी ज़िन्दगी कि खुशियाँ,
कभी तेरे नाम का भी खुमार था,
ये खुमारी किसी और के नाम कर जायेंगे|

जब सांस भी न रहेगी बदन में,
फिर भी धड़कन होगी तेरे नाम की,
सोचा ना था कि मरकर भी,
तेरे दीदार को तड़पते रह जायेंगे|
ना ही चहकेंगे, ना ही भागेंगे,
तेरे महफ़िल में आ जाने से,
कभी शामें होती थी साथ में हमारी,
अब तेरी शाम तेरे ही नाम कर जायेंगे|
                                     -----------------------------------©अभिषेक

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