लेख संख्या 1 (हाँ, मैं सीढ़ी हूँ|)

बिलकुल सही पढ़ा आप ने कि मैं सीढ़ी हूँ, वैसे तो मैं एक इंसान हूँ जीता जागता इंसान, पर लोगों के लिए मैं एक सीढ़ी से बढ़कर नहीं हूँ| मैं अपने कुछ या कह लो अधिकतर मिलने वालो के लिए सीढ़ी हूँ क्योंकि उनके मेरे उपयोग का ढंग ही कुछ ऐसा है| मुझे इस बात से कोई परेशानी नहीं कि वो मुझे क्या समझते हैं पर मैं सिर्फ सीढ़ी ही तो नहीं हूँ ना|
कई कारण हैं कि मैं एक आदर्श सीढ़ी हूँ क्योकि मैं सभी के लिए कुछ अधिक ही उपलब्ध रहता हूँ| मैं यहाँ पर उन लोगों को बिलकुल भी खराब नहीं कह सकता जो मेरा उपयोग करते हैं बल्कि उनसे अच्छा कोई नहीं हो सकता| यदि वे मेरा उपयोग नहीं करेंगे तो मेरा इस संसार में होने या ना होने का क्या मतलब? मुझे ख़ुशी होती जब कोई मेरा उपयोग करता है| पर अब क्योकि मैं इंसान भी हूँ तो बदले में मुझे उनसे कुछ आशा होती है जैसे- किसी की सच्ची मित्रता की, कभी बदले में सहायता की, कभी प्रेम की, तो कभी किसी के ध्यान की| बस इन्हीं बातो को ध्यान में रखकर लगातार मैं अपना काम करता रहता हूँ|

मुझे अधिकतर ऐसे लोग मिलते हैं जो मुझे मेरी वांछित इक्षाओं का लालच देकर मुझे उपयोग कर लेते हैं, मैं ऐसे लोगों का ऋणी हूँ कम से कम मैं उपयोग तो किया गया| कुछ दूसरे प्रकार के लोग भी मिलते हैं जो कि काफी अच्छे व्यापारी गुणों वाले होते हैं वे मुझे वो सारी इक्षाएं प्रदान करते हैं पर सिर्फ तब तक जब तक मैं उनके द्वारा उपयोग किया जा सकता हूँ, या उपयोग के काबिल हूँ| फिर कुछ ऐसे पागल लोग भी मिलते हैं जो कि मुझे उपयोग करने के लिए आते हैं पर फिर मेरे साथ मेरे किसी एक पायदान पर ठहर जाते हैं और मेरी सारी इक्षाएं पूरी करते हुए मेरे साथ ही आगे जाने की सोचते हैं| अब इन्हें कौन समझाए की मैं सीढ़ी हूँ भैया लिफ्ट नहीं|


                                                           ---------------------------------©अभिषेक 

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