कविता संख्या 7( मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा )
ना मैं दशरथ का बेटा हूँ, न कान्हा सा बन पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना कर्ण के जैसा मित्र हूँ मैं, न तेरा राँझा बन पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना मैं ख़त की प्यारी वाणी हूँ, न प्रेमगीत बन पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना फूल हूँ तेरी माला का, न तेरी पायल का घुंघरू बन पाऊंगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना उपहार हैं तुझको देने को, न सिनेमा देखने जा पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना राज़ बता तू मुझको कोई, मैं हमराज़ नहीं बन पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
मैं व्यक्ति हूँ स्वनिर्मित आदर्शो का, इसी पथ पे चलता जाऊँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
------------------------©अभिषेक
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना कर्ण के जैसा मित्र हूँ मैं, न तेरा राँझा बन पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना मैं ख़त की प्यारी वाणी हूँ, न प्रेमगीत बन पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना फूल हूँ तेरी माला का, न तेरी पायल का घुंघरू बन पाऊंगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना उपहार हैं तुझको देने को, न सिनेमा देखने जा पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
ना राज़ बता तू मुझको कोई, मैं हमराज़ नहीं बन पाउँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
मैं व्यक्ति हूँ स्वनिर्मित आदर्शो का, इसी पथ पे चलता जाऊँगा,
माफ़ करना तुम मुझको मैं तुमको प्यार नहीं दे पाउँगा|
------------------------©अभिषेक
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