लेख संख्या 2(हमें तो बस इंसाफ चाहिए)

हाँ बिल्कुल हमें इंसाफ़ चाहिए, इंसाफ़ चाहिए क्योंकि किसी विशेष धर्म से सम्बंध रखने वाले ने किसी दूसरे धर्म से संबंधित व्यक्ति के साथ गलत किया है। अभी जो बीते दिनों घटित हुआ उससे तो यही लगता है कि हम बस इसलिए इंसाफ़ मांग रहे हैं क्योंकि हम उस धर्म के व्यक्ति का और उसके द्वारा चुने गए धार्मिक स्थान में किये गए घटिया कार्य से गुस्सा हैं। चलो ठीक है मतलब अगर यही घृणित कार्य कहीं और हुआ होता या किन्हीं दो धर्मों से संबंधित ना होता तो हममे क्या इतना आक्रोश ना होता?
हम सड़कों पे उतरे, हमने candle march किया, हमने नारे लगाए, पर क्या हमने ये सब इंसानियत के नज़रिए से किया? वैसे हमारा गुस्सा किसलिये निकल रहा है और कहां निकल रहा है ये जाने बिना हम बस सड़कों पर उतर आते हैं। सड़कों पे उतरना गलत नहीं है पर हमारा उद्देश्य अगर सिर्फ इंसानियत हो तो ये हमारे समाज के भविष्य को शायद अधिक सुद्रढ़ बनाएगा। हम कुछ देर के लिए बस ये भूल जाएं कि पीड़ित और गुनाहगार किसी अन्य धर्म से संबंध रखते हैं तो हमें ये निश्चय करने में आसानी होगी कि हमें इंसाफ़ किसलिये चाहिए। वैसे भी कोई विशेष धर्म, देश, वेशभूषा किसी भी घटना का कारण या उस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकते। अगर ऐसा आप सोचते हैं कि कारण उपरोक्त है तो शायद आपकी परिभाषा कुछ गड़बड़ है।
अब ये आप का चुनाव है कि आप क्या चुनते हैं? क्या करना चाहते हैं?  अब आपको इंसानियत के लिए और वाकई पीड़ित की पीड़ा को समझते हुए इंसाफ़ की मांग करनी है, या बस आपको इंसाफ़ चाहिए। चुनाव आपका है।
           ----------------------------©निधि

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