शायरी संग्रह ( मेरी वफ़ा के नगमे )
(1)
खाके बेवफाई की ठोकर मन भर गया मोहब्बत से,
वरना हम भी थे किसी के आशिक अभी कल की ही बात है|
(2)
ऐ खुदा, सर भी न दिखे उस बेवफा का,
जिसने मेरा दिल दुखाया है|
(3)
जो पूछते थे छोड़कर तो ना जाओगे,
वो आज मुंह मोड़कर जा रहे हैं|
(4)
सभी की जुबान पर मेरे लिए जिसका नाम है
उसे भी खबर नहीं कि मेरी जुबां पर उसी का नाम है|
(5)
शुक्र है खुदा का कि आँखों का पानी रंगहीन हैं,
अगर रंगीन होता तो उनकी बेवफाई का भी निशान होता|
(6)
हमें तो मोहब्बत ने ऐसे तरसा दिया,
जैसे कि पिंजरों में पंछी उन्मुक्त गगन के|
(7)
दिल में जो अंगारे जलाये बैठे हैं,
मुस्कराहट से सबसे छिपाए बैठे हैं|
कह ना सके कोई उन्हें बेवफा
इसलिए खुद ही बेवफाई किये बैठे हैं|
उठना, चलना, और गिर पड़ना, कमजोरी नहीं है|
इसे तो हम मोहब्बत का पैमाना बनाये बैठे हैं|
----------------------© सर आकाश द्विवेदी
खाके बेवफाई की ठोकर मन भर गया मोहब्बत से,
वरना हम भी थे किसी के आशिक अभी कल की ही बात है|
(2)
ऐ खुदा, सर भी न दिखे उस बेवफा का,
जिसने मेरा दिल दुखाया है|
(3)
जो पूछते थे छोड़कर तो ना जाओगे,
वो आज मुंह मोड़कर जा रहे हैं|
(4)
सभी की जुबान पर मेरे लिए जिसका नाम है
उसे भी खबर नहीं कि मेरी जुबां पर उसी का नाम है|
(5)
शुक्र है खुदा का कि आँखों का पानी रंगहीन हैं,
अगर रंगीन होता तो उनकी बेवफाई का भी निशान होता|
(6)
हमें तो मोहब्बत ने ऐसे तरसा दिया,
जैसे कि पिंजरों में पंछी उन्मुक्त गगन के|
(7)
दिल में जो अंगारे जलाये बैठे हैं,
मुस्कराहट से सबसे छिपाए बैठे हैं|
कह ना सके कोई उन्हें बेवफा
इसलिए खुद ही बेवफाई किये बैठे हैं|
उठना, चलना, और गिर पड़ना, कमजोरी नहीं है|
इसे तो हम मोहब्बत का पैमाना बनाये बैठे हैं|
----------------------© सर आकाश द्विवेदी
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