कविता संख्या 13 (बेटियां बोझ नहीं होती)


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                        जवाब नहीं मिलते


बचपन में प्यार की थपकी दी थी,
आज फिर से गले लगाओ न पापा|
हाथ पकड़ के चलना सिखाया,
आज गिरने से बचा लो न पापा|
लोरी सुना के सपने दिखाए,
आज उन्हें पूरा करने से न रोको पापा|
हर गम से दूर रखा था मुझे,
आज ज़ख्मों पे नमक न डालो पापा|
दुनिया की सारी ख़ुशी क़दमों में रखी थी,
आज दर्द दे कर न रुलाओ पापा|
ऊँचा उड़ने की सीख सिखाकर,
आज उड़ने से तो न रोको पापा|
मेरी हर ख्वाहिश  को पूरा किया है,
आज उसे मेरा बना दो न पापा|
एक गलती हो गयी मुझसे,
उसकी यूँ सजा तो न दो पापा|
माना बेटी हूँआपकी,
एक बार बेटा बनाके गले लगाओ न पापा|
आपकी मुस्कान अच्छी है, बस मेरे लिए
एक बार, मेरे लिए मुस्कराओ न पापा|
दुनिया बहुत मतलबी है,
मुझे अपने साए में छुपाओ न पापा|
सबने अकेले छोड़ दिया है,
आप तो मुंह मोड़कर न जाओ पापा|    
एक दिन तो मुझे जाना ही है,
कुछ दिन तो साथ बिठाओ न पापा|
 बहुत तडपी हूँ आपसे बात करने के लिए,
अब यूँ चुप तो न कराओ पापा|
आपकी हर बात मेरी मर्ज़ी बन जायेगी,
एक बार अपनी मर्ज़ी बताओ न पापा|
मैं तो आपकी वही नन्हीं सी बेटी हूँ,
एक बार आकर हक तो जताओ न पापा|
आपको खुदा माना है अपना,
आज खुदा से पापा बन जाओ न पापा|
                         -------------------------------------©अनामिका

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