याद उन यारों की।

कुछ यारों की याद आज भी आती है,
जो आंखों से बूंदों की बरसात भी लाती है,
अविस्मरणीय यादों की ठंडी हवा,
हौले से गालों को छूकर जाती है।
पर हम बड़े हो गए हैं और सब बदल गया है,
वो लम्हा एक सपने सा फिसल गया है।

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वो सारी बातें हम बहुत पीछे छोड़ आये हैं,
यादों को डायरी के पन्नों में मोड़ आये हैं।
वो जो मोड़ पर छोड़ आये हैं,
एक सुनहरी दुनिया,
मंज़िल पर मिलेंगे हम फिर,
ऐसे वादों से राहों को जोड़ आये हैं।
इन समझदारों की दुनिया के काबिल बनने को,
कुछ नासमझ से रिश्तों को तोड़ आये हैं।

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हां यारों की यारी अब हमारी हमराही नहीं,
पर हर जज़्बात को बक्से में समेट लाये हैं।
खुद ही जलाए थे जो दिए प्यार के,
उन्हें राहों में यूँही जलता छोड़ आये हैं।
हां हम उन्हें उनकी दुनिया में,
किसी और के हाथों सौंप आये हैं।
     ---------© अभिषेक collab with anadi

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