अब जब चाय बने तब,

जब पानी में शक्कर घुले तब आना तुम,
जब चाय की लाली चढ़े तब आना तुम,
एक अदरक सी कड़क बात बोलेंगे,
सारे उलझे हुए रिश्ते के तार खोलेंगे।
और हां, ये होगा तब आना तुम,
अब जब चाय बने तब आना तुम।

खुशबू मिले इलायची की तब आना तुम,
दूध पर गेहुंआ रंग चढ़े तब आना तुम,
छन्नी सी बातों से कड़वाहट हटाएंगे,
पकड़ के सहारे रिश्ते कप बनाएंगे।
और हां, ये होगा तब आना तुम,
अब जब चाय बने तब आना तुम।
 ----©अभिषेक

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