तुम तो निर्णय कर चुकी।

आज है बस मेरे पास,
कल तू कहीं मैं कहीं,
सोचता हूँ कह दूं तुझे,
पर क्या शब्द वो काम करेंगे,
शब्दों में कैसे पिरोऊँ वो बातें,
जिन्हें समेटने में सालों लगे,
अब सोचता हूँ कह दूं,
पर क्या करोगी सुनकर,
तुम तो निर्णय कर चुकी हो,
सौ बार सोच समझ चुकी हो।
                    इसे भी पढ़ें- कौन हो तुम?
तुमको मुझसे क्या,
मैं तो जैसे हवा का झोंका था,
आया और बाल बिखरा गया,
सच तो ये है कि मैं कुछ लाया था,
हां वही अजीब सी सुगन्ध,
जो तुमको उर्जावान करती थी,
जो तुमको छूकर महक उठती थी,
जो हर बार तुझे झकझोरती थी,
तुझसे कहने की कोशिश करती थी,
मेरी कहानी,
पर तुमको क्या?,
तुम तो निर्णय कर चुकी थी।
--©अभिषेक

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