न जानो मुझे|
न देखो मुझे, न जानो मुझे,
दूर रहो अब मुझसे तुम,
बेहतर है न पहचानो मुझे।
दूर रहो अब मुझसे तुम,
बेहतर है न पहचानो मुझे।
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थक गया हूँ खिलौना बनकर,
कभी ज्यादा तो कभी थोड़ा बनकर,
बेहतर है आज़ाद मर जाने दो मुझे।
कभी ज्यादा तो कभी थोड़ा बनकर,
बेहतर है आज़ाद मर जाने दो मुझे।
इसे भी पढ़ें-जवाब नहीं मिलते
न अभी तक ऐसा कोई आया है,
जो मेरे
हाल-ए-दिल को समझ पाया है,
छोड़ो
अब एक पहेली ही रह जाने दो मुझे।
जो मेरे
हाल-ए-दिल को समझ पाया है,
छोड़ो
अब एक पहेली ही रह जाने दो मुझे।
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अब इतना कहते हो तो राहत करता हूँ,
क्योंकि शब्दों की मैं इबादत करता हूँ,
चलो मेरी पहेलियों में ही ढूंढो मुझे।
क्योंकि शब्दों की मैं इबादत करता हूँ,
चलो मेरी पहेलियों में ही ढूंढो मुझे।
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अगर देखना है, जानना है,
करीब से पहचानना है,
मेरी नज़्मों में पढ़ डालो मुझे।
करीब से पहचानना है,
मेरी नज़्मों में पढ़ डालो मुझे।
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जो भी लिखा है, जब भी लिखा है,
खुद ही लिखा है, खुद को लिखा है,
फिर न समझ पाए तो जाने दो मुझे।
------------------© अभिषेक
खुद ही लिखा है, खुद को लिखा है,
फिर न समझ पाए तो जाने दो मुझे।
------------------© अभिषेक
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