नज़रों के मिलते ही

नजरों के मिलते ही तेरी नज़रें जो झुक जाती हैं,
कसम से मेरी दुनिया  बस वहीँ रुक जाती है,
तेरी उंगलियाँ मेरी उँगलियों से गलती से जो छू जाती हैं,
मेरे तन बदन में बिजली सी दौड़ जाती है|

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जब इन मूक आँखों से सबकुछ बोल जाती हो,
सारे अनकहे राज़ बिन पूछे ही खोल जाती हो,
जो होठों से बरसाती हो फूल महक वाले,
क्या हमारे कत्ल को ये बाल खोल आती हो|

                                                                    इसे भी पढ़ें-जब हम दूर हो जायेंगे

जब इस खुशनुमा बारिश में तुम भीग जाती हो,
क्या कहर ढाती हो, क्यों हमे बहकाती हो,
झटककर केश से बूँदें जो आज़ाद करती हो,
क्यों अपने खूबसूरत इरादे यूँ सरेआम करती हो|

                                                                    इसे भी पढ़ें-मैंने खुद को बड़ा होते देखा है|

तुम तो हो ही ऐसी जिसे सब प्यार करते हैं,
तेरी रूह भी कोमल मुझे अच्छा बनाती है,
करके बेईमानी खुद से सबकुछ तुझ पे मैं वार दूँ,
बोल कब खुद को मिटाकर मैं तुझ को संवार दूँ,
तुझे प्यार करने की यही एक राह मालूम है,
जो मुझ नाकाबिल को तेरे प्यार के काबिल बनाती है|
                                                ----------------©अभिषेक


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