अधूरा एहसास
कोई राज़ है,
अल्फ़ाज़ में
कोई आज है,
कोई आज में।
इसे पढ़ें-लघु कथा( कर्म लौटकर आया)
तुम कौन हो?,
मैं कौन हूँ?,
एक साज़ है
एक साज़ में।
तुम शोर हो,
मैं शांत हूँ,
एक बात है
एक बात में।
इसे पढें-सफर लम्बा था क्या?
तुम सर्व हो
मैं शून्य हूँ,
एक पाठ है,
एक पाठ में।
वो नाम है,
वो गुमनाम है,
एक शाम है,
एक शाम में।
इसे पढ़ें-न जानो मुझे
वो प्यास है,
वो दर्द है,
एक आस है,
एक आस में।
जो लिख दिया,
जो न लिखा,
एक सार है,
एक सार में।
इसे पढ़ें-वो मज़दूर है साहब।
कुछ बात है,
कुछ खास है,
इस अधूरे
एहसास में।
-----©अभिषेक
अल्फ़ाज़ में
कोई आज है,
कोई आज में।
इसे पढ़ें-लघु कथा( कर्म लौटकर आया)
तुम कौन हो?,
मैं कौन हूँ?,
एक साज़ है
एक साज़ में।
तुम शोर हो,
मैं शांत हूँ,
एक बात है
एक बात में।
इसे पढें-सफर लम्बा था क्या?
तुम सर्व हो
मैं शून्य हूँ,
एक पाठ है,
एक पाठ में।
वो नाम है,
वो गुमनाम है,
एक शाम है,
एक शाम में।
इसे पढ़ें-न जानो मुझे
वो प्यास है,
वो दर्द है,
एक आस है,
एक आस में।
जो लिख दिया,
जो न लिखा,
एक सार है,
एक सार में।
इसे पढ़ें-वो मज़दूर है साहब।
कुछ बात है,
कुछ खास है,
इस अधूरे
एहसास में।
-----©अभिषेक
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